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Thursday, April 8, 2010

अलविदा न कहना

खुशबुओं की तरह मेरी सांसों में रहना,
लहू बनके मेरी नस नस में बहना,
दोस्ती होती है रिश्तों का अनमोल गहना,
इस दोस्ती को कभी अलविदा न कहना,
याद आये कभी तो आँखें बंद न करना,
हम न भी मिलें तो गम न करना,
दोस्ती उनसे करो जो निभाना जानते हों,

नफरत उनसे करो जो भुलाना जानते हों,
गुस्सा उनसे करो जो मनाना जानते हों,
प्यार उनसे करो जो दिल लुटाना जानते हों,
बहते अश्कों की ज़ुबां नहीं होती,
लफ्जों में दोस्ती बयां नहीं होती.

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