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Wednesday, March 16, 2011

सुबह

'सुबह' क्या सचमुच होगी ?
'दिन' जैसी कोई वस्तु होती है क्या ?
क्या मैं उसे पहाड़ों से देख पाती
यदि मैं उन्हीं की तरह ऊँची होती ?

क्या उसके कुमुदिनी की तरह पैर हैं ?
क्या उसके पंछी की तरह पर हैं ?
क्या वह उन प्रसिद्ध देशों से आयात होती है
मैंने जिनके बारे में कभी नहीं सुना ?

अरे कोई विद्वान! अरे कोई नाविक!
अरे कोई जादूगर आकाश का !
छोटे-से इस तीर्थयात्री को बताएगा
वह जगह जिसे 'सुबह' कहते हैं, कहाँ होती है !

घोटाले करने की शायद दिल्ली को बीमारी है

घोटाले करने की शायद दिल्ली को बीमारी है
रपट लिखाने मत जाना तुम ये धंधा सरकारी है ।

तुमको पत्थर मारेंगे सब रुसवा तुम हो जाओगे
मुझसे मिलने मत आओ मुझपे फतवा जारी है ।

हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई आपस में सब भाई हैं 
इस चक्कर मेँ मत पड़िएगा ये दावा अख़बारी है ।

भारतवासी कुछ दिन से रूखी रोटी खाते हैं 
पानी पीकर जीते हैं महँगी  सब तरकारी है ।

जीना है तो झूठ भी बोलो घुमा-फिरा कर बात करो
केवल सच्ची बातें करना बहुत बड़ी बीमारी है ।