ज़िंदगी का हर पल पूरी तरह से जीता हूँ..
हमेशा हंसना और दूसरों को हसाना आदत है।
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गम मे भी मुस्कुराना चाहता हूँ मैं,
तुम्हें भुलाके नई दुनिया बसाना चाहता हूँ मैं;
मगर न जाने क्यूँ निकल आते हैं आँसू,
जब भी तुम्हें भुलाना चाहता हूँ मैं!
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आँसू को बहुत समझाया तनहाई मे आया करो,
महफिल मे हमारा मज़ाक न उड़ाया करो,
इस पर आँसू तड़प कर बोले.
इतने.लोगों मे आपको तनहा पाते हैं ,,
बस इसलिए चले आते हैं!!
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यूँ दूर रह कर दूरियों को बढ़ाया नहीं करते,
अपने दीवाने को सताया नहीं करते;
क्यूँ इस तरह से यह दर्द हमें दे रहे हो,
इस तरह से प्यार करने वालों को सताया नहीं करते!
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अब आँसुओं को आँखों मे सजाना होगा,
चिराग बुझ गए खुद को जलाना होगा;
न समझना कि तुम से बिछड़ कर खुश हैं,
हमे लोगों की खातिर मुस्कुराना होगा!!
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