ऐसा दोस्त चाहिए जो हमे अपना मान सके,
जो हमारा दिल को जान सके,
चल रहा हो हम तेज़ बेरिश मे,
फिर भी पानी मे से आँसुओ को पहचान सके!!!!
ख़ुश्बू की तरह मेरी सांसो मे रेहाना……
लहू बनके मेरी नसनस मे बेहाना,
दोस्ती होती है रिस्तो का अनमोल गेहना………..*******
इसलिया इस दोस्ती को कभी अलविदा ना कहना.***********
याद आए कभी तो आँखें बंद मत करना.................
हम ना भी मिलें तो गम मत करना!!!!
ज़रूरी तो नही के हम नेट पेर हैर रोज़ मिलें
मगर ये दोस्ती का एहसास कभी कम मत करना.......................
दोस्ती उन से करो जो निभाना जानते हो...............
नफ़रत उन से करो जो भूलना जानते हो................
ग़ुस्सा उन से करो जो मानना जनता हो...........
प्यार उनसे करो जो दिल लुटाना जनता हो.................***
Monday, April 5, 2010
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment